घुईयां (अरबी) वनस्पति की आयुर्वेदिक जानकारी
• परिचय :
घुईयां (अरबी) एक वार्षिक कंदीय वनस्पति है, जो मुख्यतः वर्षा ऋतु में उगती है। इसकी पत्तियों का उपयोग भोजन में किया जाता है। इससे विभिन्न प्रकार के व्यंजन जैसे पत्तोड़, सूप तथा अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है।
• नाम :
मराठी नाम : आळू, अळूकुडी
हिंदी नाम : घुईयां, अरबी
अंग्रेजी नाम : Taro, Elephant Ear Plant
संस्कृत नाम : आलुकी, कच्छू, कचूर
वैज्ञानिक नाम : Colocasia esculenta
कुल (Family) : Araceae
• पाए जाने वाले देश :
भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा उष्णकटिबंधीय एवं आर्द्र जलवायु वाले देशों में घुईयां व्यापक रूप से पाई जाती है।
• वनस्पति की संरचना :
• जड़ें :
इस पौधे की जड़ें रेशेदार (तंतुमय) होती हैं। ये मिट्टी में फैलकर पौधे को मजबूती प्रदान करती हैं तथा पोषक तत्वों और जल का अवशोषण करती हैं।
• तना :
इसका तना कंद के रूप में होता है, जो हरे या गहरे रंग का हो सकता है। यही कंद भोजन का भंडारण करता है तथा नए पौधों की उत्पत्ति का मुख्य स्रोत होता है।
• पत्तियां :
घुईयां की पत्तियां बड़ी, हृदयाकार तथा ढाल जैसी होती हैं। इनका रंग हरा होता है। पत्तियों की सतह पर मोम जैसी परत होती है, जिसके कारण पानी उन पर नहीं ठहरता। इनके डंठल लंबे, मोटे और रसयुक्त होते हैं।
• फूल :
इसके फूल छोटे, पीले अथवा हल्के रंग के होते हैं। इसका पुष्पक्रम स्पैडिक्स (Spadix) कहलाता है, जिसके चारों ओर स्पेथ (Spathe) नामक आवरण होता है। इसके फूल अधिक आकर्षक नहीं होते।
• फल :
इसमें छोटे बेर जैसे फल लगते हैं। पकने पर ये फट जाते हैं और इनके बीज दूर-दूर तक फैल जाते हैं। इसके अतिरिक्त कंदों के माध्यम से भी पौधे का प्रसार होता है।
• घुईयां में पाए जाने वाले पोषक एवं औषधीय तत्व :
घुईयां में निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं –
• घुईयां का औषधीय महत्व :
जोड़ों के दर्द में नियमित रूप से घुईयां का सेवन लाभदायक माना जाता है।
इसमें उपस्थित फाइबर वजन कम करने में सहायता करता है।
कब्ज तथा पाचन संबंधी समस्याओं में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है।
शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में सहायक है।
विटामिन A आंखों के स्वास्थ्य तथा मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।
आयरन की उपस्थिति रक्त निर्माण में सहायता करती है।
रक्ताल्पता (एनीमिया) को कम करने में सहायक मानी जाती है।
बुखार की स्थिति में इसका सेवन लाभकारी माना जाता है।
यह शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने तथा खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में सहायक हो सकता है।
प्रसूता महिलाओं में स्तनपान हेतु दूध की मात्रा बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
विटामिन C घावों को शीघ्र भरने में सहायता करता है।
आयुर्वेद के अनुसार यह वात, कफ एवं पित्त दोषों पर प्रभाव डालने वाली वनस्पति मानी जाती है।
विषैले कीट के काटने पर इसकी पत्तियों का लेप लगाने से दर्द में राहत मिलने का पारंपरिक उल्लेख मिलता है। कुछ स्थानों पर इसका रस भी उपयोग किया जाता है।
• घुईयां का सेवन किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों को इसका सेवन सीमित मात्रा में या चिकित्सकीय सलाह से करना चाहिए।
दमा (अस्थमा) से पीड़ित व्यक्तियों को सावधानी बरतनी चाहिए।
गुर्दे की पथरी या ऑक्सलेट संबंधी समस्याओं वाले लोगों को चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।
• घुईयां का सेवन कैसे करें?
घुईयां की पत्तियों में कैल्शियम ऑक्सलेट के सूक्ष्म क्रिस्टल होते हैं, जो खुजली या जलन उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए इसे कच्चा नहीं खाना चाहिए।
पत्तियों और डंठलों को अच्छी तरह धोकर काट लें तथा गर्म पानी में अच्छी तरह पकाएं।
पकाते समय इमली, अमचूर या कोकम (आमसूल) जैसे खट्टे पदार्थ मिलाने से खुजली पैदा करने वाले तत्व कम हो जाते हैं।
इससे सूप, सब्जी अथवा अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
इसकी पत्तियों से पत्तोड़ (अरबी के पत्तों की वड़ी) भी बनाई जाती है।
• खेती :
घुईयां की खेती के लिए उष्ण एवं आर्द्र जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। पर्याप्त जल उपलब्धता वाली, उपजाऊ तथा जैविक खाद युक्त मिट्टी में इसका विकास अच्छी तरह होता है।
• सावधानी :
किसी भी औषधीय वनस्पति का सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से करना अधिक लाभकारी होता है। व्यक्ति की प्रकृति, स्वास्थ्य स्थिति तथा रोग के अनुसार इसका सेवन करना चाहिए।
• निष्कर्ष :
घुईयां (अरबी) एक पौष्टिक एवं बहुउपयोगी कंदीय वनस्पति है। इसकी पत्तियां और कंद भोजन के साथ-साथ पारंपरिक आयुर्वेदिक उपयोगों में भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उचित मात्रा एवं सही विधि से सेवन करने पर यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
यह है घुईयां (अरबी) के बारे हे जाणकारी हिंदी मे
Ghuiya ke bare me jankari hindi me




