चंद्रशूर,अलीव (हलीम) बीज खाने के फायदे
Chndrshur,Aliv Dhany Khane Ke Fayde
नाम :
मराठी नाम : अळीव / हळीम / हळीव
हिंदी नाम : हलीम / चंद्रशूर
अंग्रेज़ी नाम : Garden Cress Seeds
संस्कृत नाम : चंद्रशूर
वैज्ञानिक नाम : Lepidium sativum
वनस्पति का वर्गीकरण :
कुल (Family) : Brassicaceae (सरसों कुल)
आयुष्य : वार्षिक पौधा
उपयोग : धान्य, औषधि एवं पौष्टिक आहार
मूल देश : इथियोपिया.
वनस्पति की रचना :
तना :
हरा रंग का होता है तथा लगभग 20 से 60 सेंटीमीटर तक बढ़ता है। एकल पौधा होता है।
पत्तियाँ :
छोटी, हल्की मुड़ी हुई तथा हरे रंग की होती हैं। स्वाद में तीखी होती हैं।
फूल :
छोटे सफेद रंग के होते हैं तथा गुच्छों में आते हैं।
जड़ :
रेशेदार (तंतुमय) होती है।
फल :
छोटे और चपटे होते हैं। इनके अंदर छोटे बीज होते हैं, जिन्हें अलीव धान्य कहा जाता है। ये बीज पानी में डालने पर फूलकर चिपचिपे हो जाते हैं तथा भोजन में उपयोग किए जाते हैं।
पोषक तत्व :
प्रति 10 ग्राम में पौष्टिकता
प्रोटीन – 2.5%
वसा (फैट) – 2.45%
सेल्युलोज (फाइबर) – 0.7%
कार्बोहाइड्रेट – 3.3%
ऊर्जा – 45%
अलीव धान्य का औषधीय महत्व :
अलीव खाने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है। हीमोग्लोबिन बढ़ने से शरीर स्वस्थ और ताकतवर रहता है।
शरीर के हार्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करता है। विशेष रूप से महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्याएँ कम करता है तथा हार्मोन असंतुलन सुधारता है।
प्रसूता महिलाओं में दूध बढ़ाने में सहायक होता है। अलीव के लड्डू या खीर देना लाभकारी माना जाता है। इससे दूध की गुणवत्ता बढ़ती है तथा माँ और बच्चे दोनों को कैल्शियम, आयरन और ऊर्जा मिलती है।
त्वचा और बालों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसमें विटामिन E, मैग्नीशियम और प्रोटीन होने के कारण बालों की वृद्धि होती है और बाल घने बनते हैं। चेहरे व शरीर के दाग-धब्बे कम करने में मदद करता है। रक्त की मात्रा बढ़ने से मुहाँसे और काले धब्बे कम होते हैं तथा बाल चमकदार बनते हैं।
हल्का, पाचनशक्ति बढ़ाने वाला तथा फाइबर युक्त होने के कारण पाचन सुधारता है। पेट के विकार, अपच और गैस कम करता है तथा मल त्याग को नियमित करने में मदद करता है।
कैंसर रोग में कैंसर कोशिकाओं को कम करने और स्वास्थ्य सुधारने में सहायक माना जाता है।
इसमें उपस्थित रैपिडॉनिक और लिनोलेनिक एसिड स्मरणशक्ति बढ़ाने तथा बुद्धि तेज करने में मदद करते हैं।
दमा, सर्दी, कफ और गले की खराश में लाभकारी है। कफ बाहर निकालने में मदद करता है तथा सांस लेने में राहत देता है और आवाज साफ करता है।
शरीर का खराब कोलेस्ट्रॉल (Bad Cholesterol) कम करता है तथा अच्छा कोलेस्ट्रॉल (Good Cholesterol) बढ़ाने में मदद करता है।
वात दोष, जोड़ों की समस्या तथा जोड़ों में होने वाली आवाज को कम करने में सहायक है। जोड़ों के स्वास्थ्य को सुधारता है तथा कैल्शियम की पूर्ति करता है।
महिलाओं में गर्भाशय की शुद्धि कर मासिक धर्म नियमित करने में मदद करता है। पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
कैसे खाएँ :
अलीव धान्य के लड्डू या खीर बनाकर खाना लाभदायक है।
7 से 10 ग्राम मात्रा सप्ताह में 2 से 3 बार लेना लाभकारी माना जाता है।
शुरुआत में 7 से 8 दाने खाकर शरीर की प्रतिक्रिया देखनी चाहिए। बाद में प्रकृति अनुसार सेवन करें।
सलाद या कोशिंबीर पर भिगोकर डालकर खा सकते हैं।
लड्डू बनाते समय गुड़, नारियल, घी और नारियल पानी मिलाकर बनाना अधिक लाभकारी माना जाता है।
अलीव कौन न खाए?
अधिक मात्रा में खाने से पेशाब संबंधी समस्याएँ तथा शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। जिनकी शरीर प्रकृति गर्म हो, वे सीमित मात्रा में सेवन करें।
गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि गर्भपात का खतरा हो सकता है।
थायरॉइड की समस्या होने पर कम मात्रा में खाएँ अथवा वैद्यकीय सलाह लें।
गर्मियों में कम मात्रा में सेवन करें। सर्दियों में इसका सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है।
शरीर और प्रकृति के अनुसार शुरुआत में 7 से 8 दाने खाकर परीक्षण करें, फिर आवश्यकता अनुसार सेवन करें।
सूचना :
किसी भी धान्य या औषधि का सेवन अपनी कफ, पित्त और वात प्रकृति को ध्यान में रखकर डॉक्टर अथवा वैद्य की सलाह से करना अधिक लाभकारी होता है।
इस प्रकार अलीव धान्य की औषधीय जानकारी महत्वपूर्ण और उपयोगी मानी जाती है। Aliv , chndrshur ke bare me jankari hindi me

















